अनंत चतुर्दशी 2026: तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और गणेश विसर्जन की पूरी जानकारी
Sep 20, 2026
अनंत चतुर्दशी 2026 (Anant Chaturdashi 2026) शुक्रवार, 25 सितंबर को है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की यह चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात 11:18 बजे शुरू होकर 25 सितंबर की रात 11:06 बजे तक रहती है, और पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:11 बजे से रात 11:06 बजे तक रहेगा। इसी दिन 10 दिन तक चलने वाले गणेशोत्सव के आखिरी दिन गणेश जी का मुख्य विसर्जन (Ganesh Visarjan 2026) भी किया जाता है। इस लेख में अनंत चतुर्दशी की तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, पूजा सामग्री और गणेश विसर्जन से जुड़ी हर जरूरी जानकारी क्रम से दी गई है।
अनंत चतुर्दशी कब है 2026 (Anant Chaturdashi Kab Hai 2026)
पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर 2026 की रात 11:18 बजे शुरू होती है और 25 सितंबर 2026 की रात 11:06 बजे समाप्त होती है। उदया तिथि के हिसाब से अनंत चतुर्दशी 2026 शुक्रवार, 25 सितंबर को मनाई जाएगी।
| विवरण | समय/तारीख |
|---|---|
| अनंत चतुर्दशी 2026 | शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 |
| चतुर्दशी तिथि प्रारंभ | 24 सितंबर 2026, रात 11:18 बजे |
| चतुर्दशी तिथि समाप्त | 25 सितंबर 2026, रात 11:06 बजे |
| पूजा शुभ मुहूर्त | सुबह 06:11 बजे से रात 11:06 बजे तक |
| गणेश विसर्जन (मुख्य) | 25 सितंबर 2026, शुक्रवार, इसी दिन |
यह मुहूर्त नई दिल्ली के पंचांग पर आधारित है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त का समय अलग होने से मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर आ सकता है, इसलिए पूजा से पहले अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय एक बार मिला लेना बेहतर रहता है।
अनंत चतुर्दशी 2026 शुभ मुहूर्त (Anant Chaturdashi Shubh Muhurat 2026)
अनंत चतुर्दशी की पूजा पूरे दिन में कभी भी की जा सकती है, यानी पूजा शुभ मुहूर्त सुबह 06:11 बजे से रात 11:06 बजे तक करीब 17 घंटे का है। जो लोग चौघड़िया के हिसाब से समय तय करना चाहते हैं, वे नीचे दी गई विंडो में से कोई भी चुन सकते हैं।
चौघड़िया मुहूर्त (Choghadiya Muhurat)
- प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत): सुबह 06:11 बजे से 10:42 बजे तक
- अपराह्न मुहूर्त (शुभ): दोपहर 12:13 बजे से 01:43 बजे तक
- अपराह्न मुहूर्त (चर): शाम 04:44 बजे से 06:14 बजे तक
- रात्रि मुहूर्त (लाभ): रात 09:14 बजे से 10:43 बजे तक
- रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर): रात 12:13 बजे से सुबह 04:42 बजे तक (26 सितंबर)
अनंत चतुर्दशी का धार्मिक महत्व
अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित पर्व है। इस दिन भगवान विष्णु की शेषनाग की शय्या पर विराजमान प्रतिमा या चित्र की पूजा की जाती है। मान्यता है कि महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को वनवास के दौरान यह व्रत रखने की सलाह दी थी, जिससे पांडवों के कष्ट दूर हुए।
इस दिन 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांधने की परंपरा है। ये 14 गांठें भगवान विष्णु द्वारा रचे गए 14 लोकों की प्रतीक मानी जाती हैं। पुरुष इसे दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में बांधती हैं। मान्यता है कि इससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन की परेशानियां कम होती हैं।
अनंत चतुर्दशी उसी दिन पड़ती है जिस दिन 10 दिन तक चलने वाले गणेशोत्सव का समापन होता है। गणेश चतुर्थी (14 सितंबर 2026) से शुरू हुआ उत्सव इसी तिथि पर गणेश विसर्जन के साथ पूरा होता है, इसलिए अनंत चतुर्दशी को गणेश विसर्जन के दिन के रूप में भी जाना जाता है।
अनंत चतुर्दशी पूजा विधि (Anant Chaturdashi Puja Vidhi)
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। पीला वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
- पूजा स्थान को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।
- चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान विष्णु की शेषशय्या पर विराजमान प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। साथ में गणेश जी की प्रतिमा भी रखी जा सकती है।
- प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं और चंदन, हल्दी, रोली व केसर से तिलक करें।
- एक सूती या रेशमी धागे को हल्दी से रंगकर उसमें 14 गांठें लगाएं। यही अनंत सूत्र भगवान विष्णु के सामने रखा जाता है।
- फूल, अक्षत, सुपारी, दूर्वा और तुलसी दल अर्पित करें।
- धूप और दीपक जलाएं, फिर फल-मिठाई का भोग लगाएं।
- अनंत चतुर्दशी व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
- विष्णु सहस्रनाम या "ॐ अनंताय नमः" मंत्र का जाप करें।
- पूजा पूरी होने के बाद पुरुष अनंत सूत्र को दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में बांधें।
- कपूर से आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
अनंत चतुर्दशी पूजा सामग्री किट
अनंत चतुर्दशी व्रत पूजा सामग्री (Anant Chaturdashi Vrat Puja Samagri)
अनंत चतुर्दशी पूजा सामग्री (Anant Chaturdashi Puja Samagri) जुटाते समय विष्णु पूजन, अनंत सूत्र और भोग-आरती, इन तीनों की सामग्री अलग-अलग रखना आसान रहता है।
विष्णु पूजन सामग्री
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और शेषनाग की तस्वीर या प्रतिमा | स्थापना और पूजा के लिए |
| गणेश जी की प्रतिमा | साथ में पूजन के लिए |
| पीला वस्त्र | चौकी पर बिछाने के लिए |
| रोली, चंदन, हल्दी | तिलक के लिए |
| अक्षत | अर्पण सामग्री |
| सफेद तिल, सिंदूर | पूजन सामग्री |
| जनेऊ, मौली | वस्त्र-आभूषण अर्पण के लिए |
| गंगाजल, एक लोटा जल | अभिषेक और शुद्धि के लिए |
अनंत सूत्र सामग्री
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| शुद्ध सूती या रेशमी धागा | अनंत सूत्र बनाने के लिए |
| हल्दी की गांठ या केसर | धागे को रंगने के लिए |
| 14 गांठ वाला तैयार अनंत सूत्र | जिनके पास समय कम हो, वे तैयार सूत्र भी ले सकते हैं |
भोग और आरती सामग्री
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| अगरबत्ती | सुगंध और वातावरण शुद्धि के लिए |
| धूप बत्ती | वातावरण शुद्धि के लिए |
| भीमसेनी कपूर | आरती के लिए |
| दीपक और रुई की बाती | दीप जलाने के लिए |
| फल और मिठाई | भोग के लिए |
| फूल, तुलसी दल, अशोक के पत्ते | अर्पण और सजावट के लिए |
| सुपारी, दक्षिणा, माचिस | पूजन सामग्री के रूप में |
| अनंत चतुर्दशी व्रत कथा की किताब | कथा पढ़ने या सुनने के लिए |
अगर ऊद प्रीमियम मसाला अगरबत्ती
पूजा सामग्री जुटाने में समय ना लगे तो Dhoop Chaon & Co की पूजा सामग्री कलेक्शन से अगरबत्ती, धूप, भीमसेनी कपूर और पूजा किट एक साथ ऑर्डर की जा सकती है।
गणेश विसर्जन 2026 (Ganesh Visarjan 2026)
गणेश चतुर्थी 2026 सोमवार, 14 सितंबर को मनाई गई थी, और इसी दिन से 10 दिन का गणेशोत्सव शुरू हुआ था। परंपरा के अनुसार कुछ घरों में गणपति डेढ़ दिन के लिए विराजते हैं, तो कुछ में 3, 5, 7 या 10 दिन तक। 10 दिन वाली परंपरा में मुख्य और सबसे बड़ा विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन ही होता है।
गणेश विसर्जन 2026 तारीख (Ganesh Visarjan 2026 Tarikh)
| परंपरा | विसर्जन की तारीख |
|---|---|
| डेढ़ दिन का गणपति | 15 सितंबर 2026, मंगलवार |
| 3 दिन का गणपति | 16 सितंबर 2026, बुधवार |
| 5 दिन का गणपति | 18 सितंबर 2026, शुक्रवार |
| 7 दिन का गणपति | 20 सितंबर 2026, रविवार |
| 10 दिन/अनंत चतुर्दशी (मुख्य विसर्जन) | 25 सितंबर 2026, शुक्रवार |
इनमें से कोई भी तारीख गलत नहीं मानी जाती, यह पूरी तरह परिवार या मंडल की अपनी परंपरा पर निर्भर करता है।
गणेश विसर्जन शुभ मुहूर्त 2026 (Ganesh Visarjan Shubh Muhurat 2026)
गणपति स्थापना की तरह विसर्जन का कोई एक तय मुहूर्त नहीं होता, क्योंकि यह विदाई का समय है, तिथि से बंधा हुआ संकल्प नहीं। फिर भी दिन के शुभ मुहूर्त में विसर्जन करना बेहतर माना जाता है और अशुभ समय से बचा जाता है। 25 सितंबर 2026 के लिए ये मुहूर्त देखे जा सकते हैं।
| मुहूर्त | समय |
|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 04:28 बजे से 05:15 बजे तक |
| प्रातः संध्या | सुबह 04:52 बजे से 06:03 बजे तक |
| अभिजित मुहूर्त | सुबह 11:41 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02:06 बजे से 02:54 बजे तक |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 06:07 बजे से 06:31 बजे तक |
| अमृत काल | रात 03:28 बजे से सुबह 05:05 बजे तक (26 सितंबर) |
राहुकाल सुबह 10:35 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक रहेगा। पूजा या विसर्जन जैसे शुभ कामों के लिए इस अवधि को टालना बेहतर माना जाता है।
गणेश विसर्जन पूजा विधि (Ganesh Visarjan Puja Vidhi)
विसर्जन से पहले गणपति बप्पा की अंतिम पूजा की जाती है, जिसे उत्तर पूजा कहते हैं।
- स्नान करके साफ वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थान को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।
- गणपति बप्पा को सम्मानपूर्वक उनके स्थान से चौकी पर व्यवस्थित करें।
- गणेश जी और रिद्धि-सिद्धि को रोली व चंदन का तिलक करें, अक्षत लगाएं।
- दूर्वा अर्पित करें और मोदक का भोग लगाएं।
- फूल-माला चढ़ाएं और दीपक जलाएं।
- परिवार के साथ कपूर से गणेश जी की आरती करें।
- पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा मांगें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
- "गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ" के जयकारों के साथ विसर्जन के लिए प्रस्थान करें।
- जल में विसर्जित करने से पहले मूर्ति के सामने धूप जलाएं, फिर पूरे सम्मान के साथ प्रतिमा को जल में प्रवाहित करें।
मिट्टी या शाडू मिट्टी की मूर्ति हो तो विसर्जन आसान रहता है और यह पर्यावरण के लिए भी बेहतर माना जाता है। कई शहरों में अब नगर निगम की तरफ से कृत्रिम कुंड भी बनाए जाते हैं, जहां मूर्ति विसर्जित की जा सकती है।
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गणेश विसर्जन पूजा सामग्री (Ganesh Visarjan Puja Samagri)
विसर्जन से पहले होने वाली उत्तर पूजा में ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती।
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| दीपक और घी/तेल | अंतिम आरती के लिए |
| भीमसेनी कपूर | आरती के लिए |
| रोली, चंदन, सिंदूर | तिलक के लिए |
| अक्षत और फूल | अर्पण के लिए |
| मोदक और फल | नैवेद्य के लिए |
| अगरबत्ती और धूप | प्रतिमा के सामने जलाने के लिए |
| जल से भरा कलश | जहां परंपरा हो |
| गंगाजल | शुद्धि के लिए |
जिन्हें घर पर हवन जैसा माहौल चाहिए, वे सांबरानी कप भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
सांबरानी नेचुरल लोबान कप धूप
पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें
अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन, दोनों एक ही दिन होने से घर में भागदौड़ थोड़ी ज्यादा रहती है। पूजा सामग्री एक-दो दिन पहले तैयार हो जाए, तो पूजा के दिन पूरा ध्यान भक्ति में लगाया जा सकता है। Dhoop Chaon & Co की पूजा सामग्री कलेक्शन में अगरबत्ती, धूप, भीमसेनी कपूर और सांबरानी कप एक ही जगह मिल जाते हैं, और तैयार पूजा किट से आखिरी समय की भागदौड़ भी कम हो जाती है।
FAQs
1. अनंत चतुर्दशी 2026 कब है?
उत्तर: अनंत चतुर्दशी 2026 शुक्रवार, 25 सितंबर को है। चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात 11:18 बजे शुरू होकर 25 सितंबर की रात 11:06 बजे समाप्त होती है।
2. अनंत चतुर्दशी का शुभ मुहूर्त क्या है?
उत्तर: अनंत चतुर्दशी 2026 की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:11 बजे से रात 11:06 बजे तक है। इस पूरे समय में पूजा की जा सकती है।
3. गणेश विसर्जन 2026 किस तारीख को है?
उत्तर: 10 दिन तक चलने वाले गणेशोत्सव का मुख्य और सबसे बड़ा विसर्जन 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के दिन ही होगा।
4. गणेश विसर्जन 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है?
उत्तर: विसर्जन का कोई एक तय मुहूर्त नहीं होता, फिर भी अभिजित मुहूर्त (सुबह 11:41 से दोपहर 12:29 तक) और विजय मुहूर्त (दोपहर 02:06 से 02:54 तक) जैसे समय विसर्जन के लिए शुभ माने जाते हैं। सुबह 10:35 से दोपहर 12:05 तक के राहुकाल से बचना बेहतर है।
5. अनंत चतुर्दशी पूजा सामग्री में क्या-क्या चाहिए?
उत्तर: मुख्य सामग्री में भगवान विष्णु और शेषनाग की तस्वीर, पीला वस्त्र, रोली-चंदन-अक्षत, 14 गांठ वाला अनंत सूत्र, अगरबत्ती-धूप, भीमसेनी कपूर, फल-मिठाई और फूल शामिल हैं। पूरी सूची ऊपर श्रेणियों में दी गई है।



