उगादी पूजा विधि और पूजा सामग्री
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उगादी 2026: शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और पूजा विधि

Mar 12, 2026

उगादी क्या है? (About Ugadi)

दक्षिण भारत का सबसे बड़ा नव वर्ष पर्व उगादी (Ugadi) हर साल करोड़ों हिंदुओं के दिलों में नई उमंग और नई उम्मीद लेकर आता है। 'उगादी' शब्द संस्कृत के दो शब्दों, 'युग' (Yuga) अर्थात युग और 'आदि' (Aadi) अर्थात आरंभ — से मिलकर बना है। यानी उगादी का शाब्दिक अर्थ है 'एक नए युग का आरंभ'।

उगादी का त्यौहार (Festival of Ugadi) मुख्यतः आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक राज्यों में मनाया जाता है। कर्नाटक में इसे 'युगादी (Yugadi)' के नाम से जाना जाता है। यह हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है।

हिंदू धर्म के अनुसार, इसी दिन सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा (Lord Brahma) ने इस संसार की रचना प्रारंभ की थी। उन्होंने वर्ष, माह, सप्ताह और दिन की संरचना भी इसी पावन दिन की थी। इसीलिए यह दिन सर्वाधिक शुभ और पवित्र माना जाता है।

उगादी का यह त्यौहार पूरे देश में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, महाराष्ट्र में 'गुड़ी पड़वा', सिंधी समुदाय में 'चेटी चंद', तमिलनाडु में 'पुथांडु', और राजस्थान में 'थपना'। नाम अलग हैं, परंतु भावना एक ही है, नए वर्ष का उत्साहपूर्ण स्वागत।

उगादी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Ugadi 2026: Date & Shubh Muhurat)

वर्ष 2026 में उगादी का पर्व गुरुवार , 19 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। यह तेलुगु शक संवत 1948 के नए वर्ष की शुरुआत होगी। इस वर्ष का नाम 'परभव नाम संवत्सर (Parabhava Nama Samvatsara)' है, जो हिंदू पंचांग के 60 वर्षों के चक्र में एक विशेष स्थान रखता है।

 

त्योहार (Festival)

उगादी / युगादी (Ugadi / Yugadi)

तिथि (Date)

गुरुवार, 19 मार्च 2026

संवत्सर नाम (Samvatsara)

परभव नाम संवत्सर (Parabhava Nama Samvatsara)

शक संवत (Shaka Samvat)

1948

प्रतिपदा तिथि प्रारंभ

सुबह 06:52 बजे, 19 मार्च 2026

प्रतिपदा तिथि समाप्त

सुबह 04:52 बजे, 20 मार्च 2026

शुभ पूजा मुहूर्त (Shubh Puja Muhurat)

सुबह 07:00 बजे से 10:30 बजे तक

अभ्यंग स्नान (Abhyanga Snan)

सूर्योदय से पहले, 06:00–07:00 AM

 

विशेष: प्रतिपदा तिथि सूर्योदय के समय विद्यमान रहती है, इसलिए 19 मार्च 2026 को उगादी पर्व मनाना सर्वाधिक शुभ है। पूजा का सर्वोत्तम समय प्रातः 07:00 बजे से 10:30 बजे के बीच है, जब अमृत काल और शुभ चौघड़िया का संयोग रहेगा।

पंचांगम उगादी: पंचांग श्रवण का महत्व (Panchangam Ugadi: Panchanga Shravanam)

उगादी पर्व का एक सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है 'पंचांगम उगादी (Panchangam Ugadi)' अर्थात पंचांग श्रवण। इस दिन विद्वान पंडित नए वर्ष के पंचांग का वाचन करते हैं, जिसे 'पंचांग श्रवणम (Panchanga Shravanam)' कहा जाता है।

पंचांग का वाचन सुनने से भक्तों को वर्षभर के शुभ-अशुभ योगों, वर्षा, कृषि, स्वास्थ्य और राष्ट्रीय घटनाओं का पूर्वाभास होता है। शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धापूर्वक पंचांग का श्रवण करता है, उसे देवताओं का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पंचांग श्रवण में इन बातों की जानकारी मिलती है:

✦  वर्ष का नाम और राशि फल (Varsha Phal)

✦  मानसून और वर्षा का पूर्वानुमान

✦  कृषि और फसल संबंधी भविष्यवाणियाँ

✦  स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन के संकेत

✦  शुभ और अशुभ ग्रह स्थितियाँ

पंचांग का पाठ करने वाले पंडित को नए वस्त्र और दक्षिणा देने की परंपरा है। यह कृत्य कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक माना जाता है।

उगादी पूजा सामग्री (Ugadi Pooja Items)

उगादी की पूजा को विधिपूर्वक संपन्न करने के लिए सही पूजा सामग्री (Ugadi Pooja Items) का होना अत्यंत आवश्यक है। नीचे उगादी पूजा के लिए आवश्यक सभी सामग्रियों की सूची दी गई है:

धार्मिक व प्राकृतिक सामग्री (Religious & Natural Items)

✦  नीम के फूल (Neem Flowers) — उगादी पचड़ी का मुख्य घटक

✦  आम के पत्ते (Mango Leaves) — तोरण बनाने और दरवाजे सजाने के लिए

✦  नारियल (Coconut) — देवताओं को अर्पित करने के लिए

✦  कच्चा आम (Raw Mango) — पचड़ी और पकवान बनाने के लिए

✦  गेंदे और चमेली के फूल (Marigold & Jasmine Flowers) — पूजा स्थल सजाने के लिए

✦  तुलसी पत्ते (Tulsi Leaves) — भगवान को अर्पित करने हेतु

उगादी पचड़ी की छः सामग्री (6 Ingredients of Ugadi Pachadi)

✦  नीम के फूल (Neem Flowers) — कड़वाहट, जो कठिनाइयों का प्रतीक है

✦  गुड़ (Jaggery) — मिठास, जो जीवन की खुशियों का प्रतीक है

✦  हरी मिर्च / काली मिर्च (Green Chilli/Pepper) — तीखापन, जो चुनौतियों का प्रतीक है

✦  नमक (Salt) — खारापन, जो रोजमर्रा के संघर्षों का प्रतीक है

✦  इमली का रस (Tamarind Juice) — खट्टापन, जो आश्चर्यों का प्रतीक है

✦  कच्चा आम (Raw Mango) — कसैलापन, जो नई शुरुआत का प्रतीक है

पूजन सामग्री (Puja Essentials)

✦  धूप-दीप (Dhoop & Diya) — अगरबत्ती, धूपबत्ती, कपूर

✦  सम्भ्रानी / सांभ्रानी (Sambrani / Sambhrani Cups) — वातावरण शुद्धि के लिए

✦  अक्षत (Akshat) — अखंडित चावल के दाने

✦  रोली, कुमकुम, हल्दी (Roli, Kumkum, Haldi)

✦  पंचामृत (Panchamrit) — दूध, दही, घी, शहद, शक्कर का मिश्रण

✦  तिल, जौ और फूलमाला (Sesame, Barley & Flower Garlands)

✦  सुपारी और पान के पत्ते (Betel Nut & Betel Leaves)

✦  लाल और पीले रंग का कपड़ा (Red & Yellow Cloth)

✦  पीतल का कलश (Brass Kalash) — जल भरा हुआ

 

टिप: उगादी पूजा को और अधिक सुगंधित एवं पवित्र बनाने के लिए आप Dhoop Chaon & Co (dhoopchaon.co.in) की प्रीमियम अगरबत्ती, सांभ्रानी कप और भीमसेनी कपूर का उपयोग कर सकते हैं। ये पूजा सामग्री शुद्ध और प्राकृतिक तत्वों से बनी होती है, जो आपकी पूजा को और अधिक दिव्य बनाती है।

उगादी पूजा विधि (Ugadi Puja Vidhi)

उगादी का पर्व विशेष रूप से सुबह से शुरू होता है। नीचे चरण-दर-चरण (Step-by-Step) उगादी पूजा विधि दी गई है:

1: घर की सफाई और सजावट (Step 1: Home Cleaning & Decoration)

पर्व से एक-दो दिन पहले घर को अच्छी तरह साफ करें। नकारात्मक ऊर्जा को बाहर करने के लिए घर को गोमूत्र या गंगाजल से शुद्ध करें। दरवाजों पर आम के पत्तों (Mango Leaf Torana) का तोरण बाँधें। घर के प्रवेश द्वार पर रंगोली (Muggulu) बनाएं। पूजा स्थल को फूलों और दीपों से सजाएं।

2: अभ्यंग स्नान (Step 2: Abhyanga Snan — Oil Bath)

सूर्योदय से पहले, प्रातः 06:00 बजे से 07:00 बजे के बीच, तिल के तेल या नारियल तेल से शरीर की मालिश करें। इसे 'अभ्यंग स्नान (Abhyanga Snan)' कहते हैं। फिर स्नान कर स्वच्छ और नए वस्त्र धारण करें। यह क्रिया स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।

3: दीप प्रज्वलन और आह्वान (Step 3: Lighting Diya & Invocation)

स्नान के बाद पूजा स्थल पर घी का दीपक जलाएं। अगरबत्ती (Agarbatti) और सांभ्रानी (Sambrani) जलाएं, जिससे वातावरण शुद्ध और पवित्र हो जाए। भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश का आह्वान करें।

4: कलश स्थापना (Step 4: Kalash Sthapana)

पीतल के कलश में जल भरकर उसमें सुपारी, सिक्का, हल्दी और आम के पत्ते रखें। कलश के ऊपर नारियल रखें और उसे लाल कपड़े से ढँकें। कलश के आसपास अक्षत (अखंडित चावल) रखें और रोली से स्वस्तिक बनाएं।

5: पचड़ी अर्पण (Step 5: Ugadi Pachadi Offering)

उगादी पचड़ी (Ugadi Pachadi) तैयार करें — नीम के फूल, गुड़, कच्चा आम, इमली का रस, हरी मिर्च और नमक को मिलाकर। इस षड्रस (Shadrasa — छः स्वादों) को भगवान को भोग लगाएं और फिर परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद के रूप में वितरित करें। यह छः स्वाद जीवन के सुख-दुख, उत्थान-पतन और मिठास-कड़वाहट का प्रतीक है।

6: पंचांग श्रवण (Step 6: Panchanga Shravanam)

परिवार के सभी सदस्यों के साथ बैठकर विद्वान पंडित से नए वर्ष का पंचांग (Panchangam Ugadi) सुनें। इस दौरान भगवान का स्मरण करते रहें और अपने मन में नए वर्ष के लिए शुभ संकल्प लें।

7: आरती और प्रसाद वितरण (Step 7: Aarti & Prasad Distribution)

पूजा के अंत में भगवान की आरती करें। परिवार में मिठाई, बोब्बट्लु (Bobbatlu/Puran Poli), पुलिहोरा (Pulihora) जैसे पारंपरिक व्यंजन बाँटें। पड़ोसियों और रिश्तेदारों को उगादी की शुभकामनाएं दें।

उगादी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व (Significance of Ugadi)

उगादी का त्यौहार केवल नव वर्ष मनाने तक सीमित नहीं है। इसका धार्मिक, सांस्कृतिक और कृषि संबंधी महत्व अत्यंत गहरा है:

✦  सृष्टि का आरंभ — पुराणों के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन संसार की रचना की थी।

✦  बसंत ऋतु का स्वागत — यह पर्व बसंत के आगमन का प्रतीक है, जो नई फसल और समृद्धि लाती है।

✦  नए शुभ कार्यों का आरंभ — इस दिन नया व्यवसाय, घर निर्माण, निवेश और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करना शुभ माना जाता है।

✦  60 वर्षीय संवत्सर चक्र — यह दिन हिंदू पंचांग के 60 वर्षों के चक्र में नए संवत्सर की शुरुआत करता है।

✦  जीवन का संतुलन — उगादी पचड़ी के छः स्वाद हमें सिखाते हैं कि जीवन में सुख और दुख दोनों को समभाव से स्वीकार करना चाहिए।

 

उगादी पर क्या करें और क्या न करें

करें (Do's):

✦  सूर्योदय से पहले उठें और अभ्यंग स्नान करें।

✦  घर को स्वच्छ रखें और देहरी पर रंगोली बनाएं।

✦  उगादी पचड़ी तैयार करें और परिवार के साथ बाँटें।

✦  पंचांग श्रवण करें और नए वर्ष के लिए शुभ संकल्प लें।

✦  पूजा में शुद्ध धूप, अगरबत्ती और सांभ्रानी का प्रयोग करें।

✦  नए वस्त्र पहनें, मंदिर जाएं और भगवान का आशीर्वाद लें।

✦  परिवार, मित्रों और पड़ोसियों को उगादी की शुभकामनाएं दें।

न करें (Don'ts):

✦  इस दिन कलह, विवाद या कड़वे वचन बोलने से बचें।

✦  भोजन का अपव्यय न करें; अतिथियों का सम्मान करें।

✦  पूजा में नकली या रासायनिक सामग्री का प्रयोग न करें।

✦  प्रातःकालीन पूजा को न छोड़ें; यह सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है।

निष्कर्ष

उगादी (Ugadi) केवल एक त्यौहार नहीं, यह एक जीवन दर्शन है। उगादी पचड़ी के छः स्वाद हमें सिखाते हैं कि जीवन में हर स्वाद का अपना महत्व है, कड़वाहट हो या मिठास, हर अनुभव हमें और परिपक्व बनाता है।

उगादी 2026 (19 मार्च 2026) के इस पावन अवसर पर सही शुभ मुहूर्त में पूजा करें, पंचांगम का श्रवण करें, उगादी पचड़ी का प्रसाद ग्रहण करें और नए संवत्सर की शुरुआत सकारात्मक संकल्पों के साथ करें।

पूजा को और अधिक दिव्य बनाने के लिए Dhoop Chaon & Co की शुद्ध और प्राकृतिक पूजा सामग्री — अगरबत्ती, सांभ्रानी कप, भीमसेनी कपूर और पूजा किट, का उपयोग करें। शुद्ध सुगंध से आपका पूजा वातावरण और भी पवित्र हो जाएगा।


उगादी की हार्दिक शुभकामनाएं! नया वर्ष आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाए। 

स्रोत: Republic World, Outlook India, AstroYogi, DrikPanchang, mPanchang | संदर्भ: dhoopchaon.co.in

FAQs

प्रश्न 1: उगादी 2026 कब है और यह किन राज्यों में मनाया जाता है?

उगादी 2026, बुधवार 19 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। यह मुख्यतः आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में मनाया जाता है। कर्नाटक में इसे 'युगादी (Yugadi)' कहते हैं। इसी दिन महाराष्ट्र में 'गुड़ी पड़वा' भी मनाया जाता है।

प्रश्न 2: उगादी 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है?

उगादी 2026 के लिए शुभ पूजा मुहूर्त प्रातः 07:00 बजे से 10:30 बजे के बीच है। यह अमृत काल और शुभ चौघड़िया का संयोग है। प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 06:52 बजे शुरू होती है और 20 मार्च को 04:52 बजे समाप्त होती है। अभ्यंग स्नान के लिए सूर्योदय से पहले 06:00 से 07:00 बजे का समय सर्वोत्तम है।

प्रश्न 3: उगादी पचड़ी (Ugadi Pachadi) क्या होती है और इसमें क्या मिलाया जाता है?

उगादी पचड़ी एक विशेष पारंपरिक व्यंजन है जिसमें छः स्वादों (षड्रस) का मिश्रण होता है: नीम के फूल (कड़वा), गुड़ (मीठा), इमली का रस (खट्टा), हरी मिर्च (तीखा), नमक (खारा) और कच्चा आम (कसैला)। ये छः स्वाद जीवन के विभिन्न अनुभवों — सुख, दुख, आश्चर्य, चुनौती, संघर्ष और नई शुरुआत — के प्रतीक हैं।

प्रश्न 4: पंचांगम उगादी (Panchangam Ugadi) क्या होता है और इसे सुनना क्यों जरूरी है?

पंचांगम उगादी अर्थात पंचांग श्रवणम एक विशेष अनुष्ठान है जिसमें विद्वान पंडित नए वर्ष के हिंदू पंचांग का वाचन करते हैं। इसमें नए वर्ष की वर्षा, कृषि, स्वास्थ्य और ग्रह-नक्षत्र संबंधी भविष्यवाणियाँ होती हैं। शास्त्रों के अनुसार पंचांग श्रवण से दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है और वर्षभर मंगल कार्य सफल होते हैं।

प्रश्न 5: उगादी 2026 का संवत्सर नाम क्या है और इसका क्या महत्व है?

उगादी 2026-2027 का संवत्सर नाम 'परभव नाम संवत्सर (Parabhava Nama Samvatsara)' है। यह हिंदू पंचांग के 60 वर्षों के चक्र (संवत्सर चक्र) में एक अद्वितीय नाम है। प्रत्येक संवत्सर का अपना ज्योतिषीय महत्व होता है, जो उस वर्ष के सामाजिक, कृषि और व्यक्तिगत जीवन पर प्रभाव डालता है।

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