ओणम 2026: तिथि, इतिहास, महत्व, पूजा विधि और संपूर्ण जानकारी
Jul 29, 2026
ओणम (Onam) केरल का सबसे बड़ा और सबसे प्रिय त्योहार है, जो हर साल मलयालम कैलेंडर के चिंगम महीने में मनाया जाता है। यह पर्व मूल रूप से फसल कटाई का उत्सव है, जिसके साथ राजा महाबलि की पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है। हर साल बहुत से लोग ओणम 2026 (Onam 2026) की सही तारीख जानने के लिए खोज करते हैं। इस लेख में ओणम 2026 तिथि (Onam 2026 Tithi), इतिहास, महत्व, पूजा विधि और पूजा सामग्री की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
ओणम 2026 की तारीख (Onam 2026 Date)
ओणम कब है 2026 में? (Onam Kab Hai 2026)
वर्ष 2026 में ओणम या थिरुवोणम बुधवार, 26 अगस्त को मनाया जाएगा। यह दस दिवसीय उत्सव का सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम दिन होता है, जिसे थिरुवोणम या द्वितीय ओणम भी कहा जाता है। थिरुवोणम नक्षत्र 25 अगस्त 2026 की रात करीब 10:51 बजे शुरू होकर 27 अगस्त की मध्यरात्रि के ठीक बाद तक रहता है, इसलिए मुख्य पूजा 26 अगस्त को ही होती है। उत्सव की शुरुआत इससे नौ दिन पहले अथम नक्षत्र के दिन हो जाती है।
| विवरण | तारीख/दिन (2026) |
|---|---|
| उत्सव की शुरुआत (अथम / अथाचमयम) | रविवार, 16 अगस्त 2026 |
| प्रथम ओणम (उथ्रादम) | मंगलवार, 25 अगस्त 2026 |
| द्वितीय ओणम / थिरुवोणम (मुख्य दिन) | बुधवार, 26 अगस्त 2026 |
| तृतीय ओणम (अवित्तम) | गुरुवार, 27 अगस्त 2026 |
| चतुर्थ ओणम (चथयम) | शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 |
| केरल में राजकीय अवकाश | 25 से 28 अगस्त 2026 (चार दिन) |
📌 नोट: ये समय नई दिल्ली के पंचांग पर आधारित हैं। अपने शहर के सूर्योदय के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर आ सकता है।
ओणम का इतिहास (Onam History)
ओणम का इतिहास (Onam Ka Itihas) बहुत पुराना है। माना जाता है कि यह पर्व मूल रूप से एक कृषि उत्सव के रूप में शुरू हुआ था, जब चिंगम महीने में पहली फसल कटकर घर आती थी। प्राचीन तमिल साहित्य में भी केरल के इस सामुदायिक उत्सव का उल्लेख मिलता है, जिससे पता चलता है कि यह परंपरा सदियों पुरानी है।
समय के साथ ओणम की पहचान भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा महाबलि की कथा से जुड़ गई। कोच्चि के पास स्थित त्रिक्काकरा में भगवान वामन का केरल का एकमात्र प्रसिद्ध मंदिर है, और माना जाता है कि ओणम मनाने की परंपरा यहीं से शुरू हुई।
राजा महाबलि और वामन अवतार की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार राजा महाबलि असुर कुल में जन्मे थे, फिर भी उदार और अपनी प्रजा में बेहद लोकप्रिय शासक थे। उनके राज्य में समानता और समृद्धि का बोलबाला था, जिससे देवता चिंतित हो गए और भगवान विष्णु से सहायता मांगी।
भगवान विष्णु ने वामन अवतार यानी एक बौने ब्राह्मण का रूप धारण किया और राजा महाबलि से दान में केवल तीन पग भूमि मांगी। राजा ने स्वीकृति दी। वामन भगवान ने विशाल रूप धारण कर पहले पग में पृथ्वी और दूसरे पग में स्वर्ग लोक नाप लिया। तीसरे पग के लिए जगह न बचने पर राजा महाबलि ने स्वयं अपना सिर आगे कर दिया। उनकी विनम्रता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वे हर वर्ष एक बार अपनी प्रजा से मिलने धरती पर आ सकेंगे। यही दिन थिरुवोणम के रूप में मनाया जाता है।
ओणम का महत्व (Onam Significance)
ओणम का महत्व (Onam Ka Mahatva) कई स्तरों पर देखा जा सकता है। यह एक फसल उत्सव है, जो प्रकृति और कृषि के प्रति आभार व्यक्त करता है। साथ ही यह राजा महाबलि के न्यायपूर्ण शासन और समानता के आदर्श की याद दिलाता है, जहां जाति, धर्म या आर्थिक स्थिति का कोई भेदभाव नहीं था। यही कारण है कि केरल में सभी धर्मों और समुदायों के लोग मिलकर ओणम मनाते हैं।
केरल सरकार ने ओणम को राज्य के राष्ट्रीय पर्व का दर्जा दिया है। इस दौरान पूकलम यानी फूलों की रंगोली, वल्लम काली यानी नौका दौड़, पुलिकली यानी बाघ नृत्य और कथकली जैसी शास्त्रीय नृत्य शैलियों का प्रदर्शन होता है। उत्सव का समापन ओणम साध्या नामक विशाल शाकाहारी भोज से होता है, जो केले के पत्ते पर परोसा जाता है।
दस दिवसीय ओणम उत्सव 2026 (10 Days of Onam)
| दिन | नक्षत्र | तारीख (2026) | विशेष महत्व |
|---|---|---|---|
| पहला | अथम | रविवार, 16 अगस्त | उत्सव शुरू, अथाचमयम शोभायात्रा, पहला पूकलम |
| दूसरा | चिथिरा | सोमवार, 17 अगस्त | पूकलम में नए फूल जोड़े जाते हैं |
| तीसरा | चोधी | मंगलवार, 18 अगस्त | ओणम की खरीदारी शुरू |
| चौथा | विशाखम | बुधवार, 19 अगस्त | घर की सजावट और तैयारी |
| पांचवां | अनिझम | गुरुवार, 20 अगस्त | वल्लम काली यानी नौका दौड़ |
| छठा | थ्रिकेट्टा | शुक्रवार, 21 अगस्त | सांस्कृतिक कार्यक्रम |
| सातवां | मूलम | शनिवार, 22 अगस्त | पुलिकली, कैकोट्टिकली नृत्य |
| आठवां | पूरादम | रविवार, 23 अगस्त | थ्रिक्काकरा अप्पन की स्थापना |
| नौवां / प्रथम ओणम | उथ्रादम | मंगलवार, 25 अगस्त | अंतिम तैयारियां |
| दसवां / द्वितीय ओणम | थिरुवोणम | बुधवार, 26 अगस्त | मुख्य दिन, महाबलि का आगमन, साध्या |
थिरुवोणम के बाद भी उत्सव दो दिन चलता है, अवित्तम (27 अगस्त) और चथयम (28 अगस्त) के साथ पर्व संपन्न होता है।
ओणम पूजा विधि (Onam Puja Vidhi)
केरल के घरों में ओणम पूजा विधि (Onam Puja Vidhi) सरल लेकिन श्रद्धा से भरी होती है।
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उत्सव से पहले घर की सफाई करें और मुख्य द्वार व आंगन को फूलों-तोरण से सजाएं।
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आंगन के बीच चावल के आटे या फूलों से गोलाकार पूकलम बनाएं, जिसमें हर दिन नए फूल जोड़े जाते हैं।
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पूरादम के दिन से आंगन में मिट्टी के थ्रिक्काकरा अप्पन यानी वामन भगवान की छोटी पिरामिड आकार की प्रतिमाएं स्थापित करें।
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प्रतिमा के सामने अक्षत, फूल, हल्दी-कुमकुम और मौसमी फल अर्पित करें।
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घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती व धूप जलाकर वातावरण सुगंधित करें, फिर परिवार के साथ आरती करें।
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थिरुवोणम के दिन ओणम साध्या तैयार करें और केले के पत्ते पर परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें।
ओणम पूजा के लिए सुगंधित अगरबत्ती — Dhoop Chaon & Co
ओणम पूजा सामग्री लिस्ट: ओणम पूजा के लिए क्या चाहिए (Onam Puja Samagri List)
ओणम पूजा सामग्री (Onam Puja Samagri) पहले से तैयार रखने पर पूजा और सजावट आसानी से पूरी हो जाती है। ओणम पूजा के लिए क्या चाहिए (Onam Puja Ke Liye Kya Chahiye), इसकी सूची नीचे दी गई है।
पूकलम और पारंपरिक सामग्री
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| ताजे फूल (गेंदा, गुलाब, चमेली) | पूकलम बनाने के लिए |
| चावल का आटा या रंगोली रंग | पूकलम की रूपरेखा बनाने के लिए |
| मिट्टी | थ्रिक्काकरा अप्पन की प्रतिमा के लिए |
| केले के पत्ते | साध्या परोसने के लिए |
| हल्दी, कुमकुम, अक्षत | तिलक और अर्पण के लिए |
| नए वस्त्र (ओणक्कोडी) | परिवार के सभी सदस्यों के लिए |
धूप-दीप सामग्री
ओणम पूजा के लिए अगरबत्ती (Onam Puja Ke Liye Agarbatti) और ओणम पूजा के लिए धूप (Onam Puja Ke Liye Dhoop) वातावरण को शुद्ध बनाते हैं।
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| अगरबत्ती | सुगंध के लिए |
| धूप स्टिक | पूजा स्थान की शुद्धि के लिए |
| सांबरानी कप | घर पर छोटे हवन जैसा अनुभव के लिए |
| कपूर | आरती के लिए |
| घी का दीपक, रुई की बाती | शुभता का प्रतीक |
ओणम पूजा के लिए प्रीमियम धूप स्टिक — Dhoop Chaon & Co
एक ही जगह से पूरी सामग्री मंगवानी हो तो ऑनलाइन ओणम पूजा सामग्री (Online Onam Puja Samagri) खरीदना आसान विकल्प है। Dhoop Chaon & Co की पूजा सामग्री कलेक्शन में अगरबत्ती, धूप, सांबरानी कप और कपूर एक साथ मिलते हैं।
पूजा सामग्री देखें →ओणम पूजा थाली और साध्या (Onam Puja Thali)
ओणम पूजा थाली (Onam Puja Thali) सजाते समय चौकी पर एक थाली में अक्षत, फूल, हल्दी-कुमकुम, दीपक और अगरबत्ती एक साथ रखे जाते हैं, ताकि पूजा के दौरान बार-बार सामान उठाना न पड़े। पूजा के बाद परिवार ओणम साध्या के लिए बैठता है, जिसे साध्या थाली भी कहा जाता है। इसमें सांबर, अवियल, ओलन, पचड़ी, पापड़म और पायसम सहित बीस से अधिक व्यंजन केले के पत्ते पर परोसे जाते हैं। एक तैयार ओणम पूजा किट (Onam Puja Kit) साथ रखने से यह तैयारी आसान हो जाती है, क्योंकि इसमें अगरबत्ती, धूप, कपूर जैसी जरूरी सामग्री पहले से एक साथ मिल जाती है।
ओणम पूजा के लिए प्रीमियम इंसेंस स्टिक्स — Dhoop Chaon & Co
ओणम गिफ्ट आइडियाज (Onam Gift Ideas)
ओणम पर परिवार और दोस्तों को उपहार देना पुरानी परंपरा है, जिसे ओणक्कोडी कहा जाता है। परंपरागत रूप से नए कपड़े दिए जाते हैं, पर आजकल पूजा और सुगंध से जुड़े उपहार भी पसंद किए जाते हैं। कुछ सरल ओणम गिफ्ट आइडियाज (Onam Gift Ideas):
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सुगंधित अगरबत्ती और धूप का गिफ्ट बॉक्स
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प्राकृतिक अत्तर की छोटी शीशी
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भीमसेनी कपूर और सांबरानी कप का सेट
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सजी हुई पूजा किट, जो नए घर या नई शुरुआत के लिए उपयुक्त है
ओणम गिफ्ट के लिए सैंडल फ्लोरा इंसेंस स्टिक्स — Dhoop Chaon & Co
Dhoop Chaon & Co के गिफ्ट बॉक्स कलेक्शन में ऐसे कई विकल्प मिलते हैं, जिन्हें ओणम पर अपनों को भेजना आसान और सार्थक दोनों है।
गिफ्ट बॉक्स देखें →ओणम 2026: श्रद्धा और परंपरा का संगम
ओणम केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि केरल की संस्कृति, समानता और आपसी सद्भाव का प्रतीक भी है। सही तारीख, मुहूर्त और पूजा सामग्री की जानकारी होने से पूजा और उत्सव बिना किसी रुकावट के पूरा हो जाता है। चाहे पूकलम सजाना हो या साध्या परोसना, हर रस्म में परिवार के साथ समय बिताने का भाव सबसे ज्यादा मायने रखता है।
FAQs
1: ओणम 2026 कब है?
उत्तर: ओणम या थिरुवोणम 2026 में बुधवार, 26 अगस्त को है। यह दस दिवसीय उत्सव का मुख्य और अंतिम दिन है, जिसे द्वितीय ओणम भी कहा जाता है। उत्सव की शुरुआत रविवार, 16 अगस्त 2026 को अथम नक्षत्र के दिन से होती है।
2: ओणम पूजा विधि में सबसे जरूरी चीज़ क्या है?
उत्तर: पूकलम यानी फूलों की रंगोली बनाना और थ्रिक्काकरा अप्पन (भगवान वामन) की प्रतिमा स्थापित करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। दीपक, अगरबत्ती और धूप जलाकर आरती करना भी पूजा का अहम हिस्सा है।
3: ओणम पूजा के लिए क्या-क्या सामग्री चाहिए?
उत्तर: ताजे फूल, चावल का आटा, मिट्टी, अक्षत, हल्दी-कुमकुम, केले के पत्ते, अगरबत्ती, धूप, सांबरानी कप, कपूर और घी का दीपक मुख्य रूप से शामिल हैं। ये सभी वस्तुएं पूजा सामग्री कलेक्शन से एक साथ भी मंगवाई जा सकती हैं।
4: ओणम क्यों मनाया जाता है?
उत्तर: ओणम मूल रूप से एक फसल उत्सव है, जो नई फसल के आगमन की खुशी में मनाया जाता है। साथ ही यह राजा महाबलि की धरती पर वार्षिक वापसी और भगवान वामन की कथा का उत्सव है, जो न्याय और समानता का प्रतीक माना जाता है।
5: ओणम और थिरुवोणम में क्या अंतर है?
उत्तर: ओणम पूरे दस दिवसीय उत्सव का नाम है, जबकि थिरुवोणम इसके सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम दिन को कहा जाता है। 2026 में थिरुवोणम बुधवार, 26 अगस्त को है, जब राजा महाबलि के धरती पर आगमन का उत्सव मनाया जाता है।