रक्षाबंधन 2026: राखी कब है, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पूजा सामग्री की पूरी जानकारी
Aug 18, 2026
रक्षाबंधन 2026 (Raksha Bandhan 2026) भाई-बहन के प्रेम का पर्व है, जो हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उसकी लंबी उम्र व सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, वहीं भाई जीवनभर बहन की रक्षा का वचन देते हैं। हर साल राखी की सही तारीख और शुभ मुहूर्त को लेकर लोगों के मन में सवाल रहते हैं, क्योंकि पूर्णिमा तिथि कई बार दो दिन में बंटी होती है। इस लेख में रक्षाबंधन 2026 कब है (Raksha Bandhan 2026 kab hai), शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट और भाई के लिए गिफ्ट आइडिया विस्तार से बताए गए हैं।
रक्षाबंधन 2026 शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 05:57 बजे से 09:48 बजे तक रहेगा। इस साल राखी वाले दिन भद्रा का कोई साया नहीं है, इसलिए बहनें सुबह से ही निश्चिंत होकर राखी बांध सकती हैं।
रक्षाबंधन 2026 कब है?
रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि दो दिन में फैली हुई है, इसलिए उदया तिथि यानी जिस दिन सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि रहती है, उस दिन को त्योहार की तारीख माना जाता है। इसी नियम के अनुसार रक्षाबंधन 2026 (Raksha Bandhan 2026) की तारीख तय होती है।
| विवरण | तारीख और समय |
|---|---|
| रक्षाबंधन 2026 की तारीख | शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 |
| श्रावण पूर्णिमा तिथि प्रारंभ | 27 अगस्त 2026, सुबह लगभग 09:08 बजे |
| श्रावण पूर्णिमा तिथि समाप्त | 28 अगस्त 2026, सुबह लगभग 09:48 बजे |
चूंकि 28 अगस्त की सुबह पूर्णिमा तिथि पहले से मौजूद है, इसलिए पूरे दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकता है। अपने शहर के सूर्योदय और तिथि समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से एक बार समय जरूर देख लें।
रक्षाबंधन 2026 शुभ मुहूर्त और राखी बांधने का सही समय
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 2026 (Rakhi Bandhne ka Shubh Muhurat 2026) तय करते समय सबसे पहले भद्रा काल का ध्यान रखा जाता है, क्योंकि भद्रा में राखी बांधना अशुभ माना जाता है। राहत की बात यह है कि इस साल रक्षाबंधन 2026 शुभ मुहूर्त (Raksha Bandhan 2026 Shubh Muhurat) के लिए भद्रा की कोई बाधा नहीं है।
| मुहूर्त | समय |
|---|---|
| राखी बांधने का सर्वोत्तम मुहूर्त | सुबह 05:57 बजे से 09:48 बजे तक |
| अभिजीत मुहूर्त (सुबह न बांध पाएं तो) | दोपहर 11:56 बजे से 12:48 बजे तक |
| भद्रा काल | 27 अगस्त 2026, सुबह 09:08 बजे से रात 09:32 बजे तक (28 अगस्त की सुबह भद्रा का कोई असर नहीं) |
| राहुकाल (इस समय राखी न बांधें) | सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक |
भद्रा 27 अगस्त की रात में ही समाप्त हो जाती है, इसलिए 28 अगस्त का पूरा दिन भद्रा रहित रहेगा। फिर भी राहुकाल के समय शुभ कार्य टालने की परंपरा है, इसलिए सुबह 05:57 से 09:48 के बीच वाला मुख्य मुहूर्त सबसे उपयुक्त रहेगा। जो बहनें सुबह किसी वजह से राखी न बांध पाएं, वे दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में भी यह रस्म पूरी कर सकती हैं।
इस साल रक्षाबंधन के दिन एक आंशिक चंद्र ग्रहण भी है, लेकिन यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। जो ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देता, उसका सूतक काल भारत में मान्य नहीं होता। इसलिए इस ग्रहण का रक्षाबंधन की पूजा या राखी बांधने पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
रक्षाबंधन का महत्व
रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट स्नेह का प्रतीक है। मान्यता है कि राखी का धागा सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि एक वचन है, बहन भाई की सलामती की कामना करती है और भाई हर परिस्थिति में बहन की रक्षा का संकल्प लेता है। पौराणिक कथाओं में इस रक्षासूत्र का जिक्र राजा बलि और देवी लक्ष्मी की कथा से भी जुड़ा है, इसलिए राखी बांधते समय बलि राजा का नाम लेकर मंत्र पढ़ा जाता है। सावन के पवित्र महीने में पड़ने की वजह से इस पर्व का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
रक्षाबंधन पूजा सामग्री लिस्ट (राखी पूजा थाली)
रक्षाबंधन पूजा सामग्री (Raksha Bandhan Puja Samagri) पहले से तैयार रखने से सुबह की भागदौड़ नहीं होती और पूजा शांति से पूरी होती है। नीचे रक्षाबंधन पूजा सामग्री लिस्ट (Raksha Bandhan Puja Samagri List) दी गई है, जिसे राखी पूजा थाली (Rakhi Puja Thali) में रखा जाता है।
मुख्य पूजा थाली सामग्री
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| राखी या रक्षासूत्र | भाई की कलाई पर बांधने के लिए |
| रोली और अक्षत (साबुत चावल) | भाई के माथे पर तिलक लगाने के लिए |
| दीपक और रुई की बाती | आरती के लिए |
| मिठाई | भाई का मुंह मीठा कराने के लिए |
| नारियल | पूजा में शुभ फल के रूप में |
| छोटा कपड़ा या रुमाल | भाई का सिर ढकने के लिए |
धूप, दीप और सुगंध सामग्री
रक्षाबंधन पूजा थाली सामग्री (Raksha Bandhan Puja Thali Samagri) में धूप-दीप का होना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि इससे पूजा स्थान की पवित्रता बनी रहती है और वातावरण सुगंधित हो जाता है।
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| अगरबत्ती | पूजा और घर के वातावरण को सुगंधित करने के लिए |
| भीमसेनी कपूर | आरती और वातावरण शुद्धि के लिए |
| सांबरानी कप | घर पर आसान धूप अनुभव के लिए |
| घी का दीपक | आरती के लिए |
रक्षाबंधन पूजा सामग्री ऑनलाइन (Raksha Bandhan Puja Samagri Online) मंगवानी हो तो एक ही जगह से पूरी सामग्री जुटाना आसान हो जाता है। Dhoop Chaon & Co की पूजा सामग्री कलेक्शन में अगरबत्ती, भीमसेनी कपूर, सांबरानी कप और धूप जैसी जरूरी चीजें मिल जाती हैं। जिन्हें पहले से तैयार सेट पसंद है, वे पूजा किट कलेक्शन भी देख सकते हैं। इस तरह रक्षाबंधन पूजा थाली ऑनलाइन (Raksha Bandhan Puja Thali Online) तैयार करना आसान और झंझट-मुक्त हो जाता है।
रक्षाबंधन पूजा विधि 2026
रक्षाबंधन पूजा विधि 2026 (Raksha Bandhan Puja Vidhi 2026) सरल है और इसे कोई भी घर पर आसानी से कर सकता है।
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा की थाली तैयार करें, जिसमें रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई, नारियल और राखी रखें।
- सबसे पहले घर के कुलदेवता, भगवान गणेश या बाल गोपाल को राखी अर्पित करें।
- भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठाएं।
- भाई के सिर पर रुमाल या कपड़ा रखें।
- बहन सबसे पहले भाई के माथे पर रोली और अक्षत से तिलक लगाएं।
- इसके बाद भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें और आरती उतारें।
- राखी बांधते समय नीचे दिया गया मंत्र बोलना शुभ माना जाता है।
- भाई का मुंह मीठा कराएं और उसकी लंबी उम्र की प्रार्थना करें।
- भाई अपनी बहन के चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लें और यथाशक्ति उपहार दें।
राखी बांधते समय यह पारंपरिक श्लोक बोला जाता है
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
इसका सरल अर्थ है, जिस रक्षासूत्र से महाबली राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षासूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षासूत्र, तुम स्थिर रहना, अपने संकल्प से कभी विचलित मत होना।
भाई के लिए राखी गिफ्ट आइडिया
भाई के लिए राखी गिफ्ट (Bhai ke liye Rakhi Gift) चुनते समय कुछ ऐसी चीजें भी अच्छी रहती हैं जो रोजमर्रा में काम आएं और सेहत के लिए भी अच्छी हों। रक्षाबंधन गिफ्ट ऑनलाइन (Raksha Bandhan Gift Online) ढूंढ रहे हैं तो कुछ आसान विकल्प यहां दिए गए हैं।
- अत्तर: भाई को अच्छी खुशबू पसंद हो तो अत्तर कलेक्शन से कोई एक फ्रेगरेंस चुन सकती हैं।
- गिफ्ट बॉक्स: सजे-सजाए तैयार गिफ्ट के लिए गिफ्ट बॉक्स कलेक्शन देखें, इसमें अलग से पैकिंग की जरूरत नहीं पड़ती।
- प्रीमियम अगरबत्ती और धूप सेट: जिन भाइयों को घर की पूजा या शांत माहौल पसंद है, उनके लिए अगरबत्ती का सेट भी एक विचारशील गिफ्ट है।
कुछ जरूरी बातें
रक्षाबंधन 2026 पर सही तारीख और मुहूर्त की जानकारी होने से राखी बांधने की रस्म बिना किसी असमंजस के पूरी हो जाती है। पूजा में सामग्री जितनी सही हो, श्रद्धा उतनी ही मायने रखती है। थाली में जरूरी चीजें पहले से तैयार रखने से पूजा सुविधा से पूरी होती है और त्योहार का असली आनंद भी बना रहता है।
FAQs
प्रश्न 1: रक्षाबंधन 2026 कब है?
उत्तर: रक्षाबंधन 2026 शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 09:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 09:48 बजे समाप्त होगी, और उदया तिथि के अनुसार 28 अगस्त को ही त्योहार मनाया जाएगा।
प्रश्न 2: राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या है?
उत्तर: राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त 28 अगस्त 2026 को सुबह 05:57 बजे से 09:48 बजे तक रहेगा। जो लोग सुबह राखी न बांध पाएं, वे दोपहर 11:56 बजे से 12:48 बजे तक के अभिजीत मुहूर्त में भी यह रस्म पूरी कर सकते हैं।
प्रश्न 3: क्या रक्षाबंधन 2026 पर भद्रा काल है?
उत्तर: नहीं, इस साल रक्षाबंधन के दिन भद्रा का कोई साया नहीं है। भद्रा 27 अगस्त की रात 09:32 बजे ही समाप्त हो जाती है, इसलिए 28 अगस्त का पूरा दिन भद्रा रहित रहेगा और बहनें सुबह से ही निश्चिंत होकर राखी बांध सकती हैं।
प्रश्न 4: रक्षाबंधन पूजा थाली में क्या-क्या रखना चाहिए?
उत्तर: पूजा थाली में राखी, रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई, नारियल और भाई का सिर ढकने के लिए रुमाल रखा जाता है। इसके साथ अगरबत्ती, भीमसेनी कपूर और सांबरानी जैसी धूप-दीप सामग्री भी वातावरण की पवित्रता के लिए रखी जाती है।
प्रश्न 5: रक्षाबंधन पर लगने वाले चंद्र ग्रहण का पूजा पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: 28 अगस्त 2026 को एक आंशिक चंद्र ग्रहण है, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा। जो ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देता उसका सूतक काल भारत में मान्य नहीं माना जाता, इसलिए इसका रक्षाबंधन की पूजा या राखी बांधने पर कोई असर नहीं पड़ेगा।