श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026: कब है, पूजा विधि, व्रत कथा और महत्व
Aug 18, 2026
श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 (Shravan Putrada Ekadashi 2026) सावन महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इसे पवित्रा एकादशी (Pavitra Ekadashi) भी कहा जाता है। मान्यता है कि यह व्रत संतान सुख देने वाला है, इसलिए इसका नाम पुत्रदा एकादशी पड़ा है। हर साल की तरह इस बार भी पुत्रदा एकादशी 2026 (Putrada Ekadashi 2026) की तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल है, क्योंकि स्मार्त और वैष्णव परंपरा में व्रत की तारीख अलग-अलग है। इस लेख में तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट, पूजा विधि, व्रत कथा और व्रत के नियम विस्तार से बताए गए हैं।
श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 स्मार्त परंपरा (गृहस्थ) में रविवार, 23 अगस्त को और वैष्णव परंपरा में सोमवार, 24 अगस्त को रखी जाएगी। एकादशी तिथि 23 अगस्त रात 02:00 बजे शुरू होकर 24 अगस्त सुबह 04:18 बजे समाप्त होगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, पवित्रा धागा अर्पण और व्रत कथा का पाठ किया जाता है।
श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 की तारीख और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार पुत्रदा एकादशी की तिथि 23 अगस्त की रात में शुरू होकर 24 अगस्त की सुबह जल्दी समाप्त हो जाती है। इसी वजह से स्मार्त यानी गृहस्थ परिवार और वैष्णव संप्रदाय के लोग अलग-अलग दिन व्रत रखते हैं। दोनों परंपराओं में व्रत की विधि एक जैसी है, अंतर सिर्फ व्रत रखने के दिन और पारण के समय में है। नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार पूरी जानकारी नीचे तालिका में दी गई है।
| विवरण | तारीख और समय |
| पुत्रदा एकादशी व्रत (स्मार्त/गृहस्थ परंपरा) | रविवार, 23 अगस्त 2026 |
| पुत्रदा एकादशी व्रत (वैष्णव संप्रदाय) | सोमवार, 24 अगस्त 2026 |
| एकादशी तिथि प्रारंभ | 23 अगस्त 2026, रात 02:00 बजे |
| एकादशी तिथि समाप्त | 24 अगस्त 2026, सुबह 04:18 बजे |
| हरि वासर समाप्त (24 अगस्त को) | सुबह 10:49 बजे |
| स्मार्त पारण समय | 24 अगस्त 2026, दोपहर 01:41 बजे से 04:16 बजे तक |
| वैष्णव पारण समय | 25 अगस्त 2026, सुबह 05:55 बजे से 06:20 बजे तक |
| द्वादशी तिथि समाप्त | 25 अगस्त 2026, सुबह लगभग 06:20 बजे |
जो लोग सामान्य रूप से घर पर पूजा करते हैं, वे स्मार्त परंपरा के अनुसार रविवार, 23 अगस्त को व्रत रख सकते हैं। जो लोग वैष्णव या इस्कॉन परंपरा से जुड़े हैं, वे सोमवार, 24 अगस्त को व्रत रखेंगे। पारण हमेशा द्वादशी तिथि में और हरि वासर समाप्त होने के बाद ही करना चाहिए, इसलिए ऊपर बताए गए समय का पालन करना जरूरी है। अपने शहर के सूर्योदय समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए एक बार स्थानीय पंचांग से भी समय जरूर देख लें।
पुत्रदा एकादशी 2026 का महत्व
साल में पुत्रदा एकादशी दो बार आती है, एक पौष महीने में और दूसरी श्रावण महीने में। श्रावण में पड़ने वाली एकादशी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह भगवान शिव और भगवान विष्णु, दोनों के प्रिय सावन महीने में आती है। पुत्रदा नाम का अर्थ ही है पुत्र देने वाली, यानी यह व्रत मुख्य रूप से संतान सुख की कामना से जुड़ा है। जिन दंपतियों को संतान प्राप्ति में परेशानी आ रही हो, वे श्रद्धा से यह व्रत रखते हैं।
इस एकादशी को कई जगह पवित्रा एकादशी (Pavitra Ekadashi) या पवित्रोपना एकादशी भी कहा जाता है। इसकी एक खास परंपरा है, भगवान विष्णु को पवित्रा यानी धागे की एक माला अर्पित करना। यह अर्पण पिछले समय में हुई पूजा-पाठ की किसी भूल चूक के प्रायश्चित के रूप में देखा जाता है। कई घरों में मौली या कलावा ही इस पवित्रा के रूप में विष्णु प्रतिमा पर चढ़ाया जाता है।
पुत्रदा एकादशी 2026 पर भगवान विष्णु की पूजा करने से केवल संतान सुख ही नहीं, बल्कि परिवार में सुख-शांति और मन की शुद्धि भी मिलती है, ऐसी मान्यता है। जो लोग संतान से जुड़ी कामना नहीं भी रखते, वे भी अपनी भक्ति नवीनीकृत करने और व्रत के पुण्य के लिए यह एकादशी रखते हैं।
श्रावण पुत्रदा एकादशी पूजा सामग्री लिस्ट
पूजा शुरू करने से पहले सारी पुत्रदा एकादशी पूजा सामग्री (Putrada Ekadashi Puja Samagri) तैयार रखने से पूजा बिना रुकावट पूरी होती है। नीचे पुत्रदा एकादशी पूजा सामग्री लिस्ट (Putrada Ekadashi Puja Samagri List) श्रेणियों में दी गई है।
मुख्य पूजन सामग्री
| सामग्री | उपयोग |
| भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र | पूजा स्थापना के लिए, शालिग्राम शिला भी रखी जा सकती है |
| चौकी और पीला या सफेद वस्त्र | प्रतिमा स्थापित करने के लिए |
| तुलसी दल | विष्णु पूजा में सबसे जरूरी, बिना तुलसी अर्पण अधूरा माना जाता है |
| पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) | अभिषेक के लिए |
| हल्दी, कुमकुम, चंदन | तिलक और श्रृंगार के लिए |
| अक्षत (साबुत चावल) | अर्पण सामग्री |
| पीले या सफेद फूल | पूजा में चढ़ाने के लिए |
| मौली या कलावा (पवित्रा धागा) | भगवान विष्णु को पवित्रा अर्पित करने के लिए |
| ऋतु फल और मिठाई | प्रसाद के लिए |
धूप-दीप और अन्य पूजा सामग्री
पूजा में धूप-दीप के बिना कोई भी अनुष्ठान अधूरा माना जाता है। एकादशी पूजा सामग्री ऑनलाइन (Ekadashi Puja Samagri Online) मंगवानी हो तो एक ही जगह से पूरी सामग्री मिल जाना आसान विकल्प है।
| सामग्री | उपयोग |
| अगरबत्ती | सुगंध और वातावरण की पवित्रता के लिए |
| धूप स्टिक | वातावरण शुद्धि के लिए |
| सांबरानी कप | घर पर छोटे हवन जैसे अनुभव के लिए |
| भीमसेनी कपूर | आरती और वातावरण शुद्धि के लिए |
| घी का दीपक और रुई की बाती | पूजा में दीप जलाने के लिए |
| पूजा की घंटी | पूजा आरंभ और आरती के लिए |
विष्णु पूजा सामग्री (Vishnu Puja Samagri) की पूरी रेंज एक साथ चाहिए तो Dhoop Chaon & Co की पूजा सामग्री कलेक्शन में अगरबत्ती, धूप, सांबरानी कप और भीमसेनी कपूर एक साथ मिल जाते हैं। जिन्हें पहले से तैयार पूजा किट पसंद है, वे पूजा किट कलेक्शन भी देख सकते हैं। इस तरह विष्णु पूजा सामग्री ऑनलाइन (Vishnu Puja Samagri Online) मंगवाना आसान हो जाता है और आखिरी समय की भागदौड़ भी बच जाती है।
पुत्रदा एकादशी में क्या चढ़ाएं
पुत्रदा एकादशी में क्या चढ़ाएं (Putrada Ekadashi mein kya chadhayen), यह सवाल अक्सर पूछा जाता है। भगवान विष्णु को इस दिन तुलसी दल, पीले फूल, पंचामृत, फल, पवित्रा धागा और अगरबत्ती-धूप अर्पित करना शुभ माना जाता है। तुलसी के बिना विष्णु पूजा अधूरी मानी जाती है, इसलिए इसे सबसे पहले रखें।
श्रावण पुत्रदा एकादशी पूजा विधि
श्रावण पुत्रदा एकादशी पूजा विधि (Shravan Putrada Ekadashi Puja Vidhi) सरल है, बस इसे श्रद्धा और सही समय पर करना जरूरी है। नीचे पुत्रदा एकादशी पूजा विधि (Putrada Ekadashi Puja Vidhi) चरणबद्ध तरीके से दी गई है।
- एकादशी से एक दिन पहले यानी दशमी की शाम को सात्विक और हल्का भोजन करें। इसके बाद अन्न का त्याग करें।
- एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ, पीले या सफेद वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान साफ करें और चौकी पर पीला या सफेद कपड़ा बिछाएं।
- चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं, फिर शुद्ध जल से अभिषेक करें।
- हल्दी, कुमकुम, चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करें।
- तुलसी दल अर्पित करें, यह पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा (Putrada Ekadashi par Bhagwan Vishnu ki Puja) का सबसे जरूरी हिस्सा है।
- मौली या कलावे से बनी पवित्रा माला भगवान को अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती व धूप जलाकर वातावरण को सुगंधित करें।
- एकादशी मंत्र का जाप करें और श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
- कपूर से आरती करें और भगवान से क्षमा प्रार्थना करें।
- प्रसाद अर्पित करें और परिवार में बांटें।
- रात्रि जागरण संभव हो तो भजन-कीर्तन करें, नहीं तो अगले दिन तय समय पर व्रत का पारण करें।
व्रत रखने वाले पूरे दिन उपवास रखते हैं। जो लोग निर्जला व्रत नहीं रख सकते, वे फलाहार यानी फल, दूध और कंद-मूल का सेवन कर सकते हैं।
पुत्रदा एकादशी मंत्र
पूजा के समय इन मंत्रों का जाप शुभ माना जाता है।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
यह द्वादशाक्षर मंत्र भगवान विष्णु का मुख्य मंत्र है। इसे 108 बार जपना शुभ माना जाता है।
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।।
यह विष्णु गायत्री मंत्र है, इसे सुबह की पूजा में जपा जाता है।
श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा
श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा (Shravan Putrada Ekadashi Vrat Katha) भविष्य पुराण में भगवान कृष्ण और राजा युधिष्ठिर के संवाद के रूप में मिलती है। कथा के अनुसार महिष्मती नाम के राज्य में महीजित नाम के एक धर्मात्मा राजा राज्य करते थे। वे न्यायप्रिय थे और अपनी प्रजा का पालन अच्छी तरह करते थे, लेकिन उन्हें और उनकी रानी को कोई संतान नहीं थी। इस दुख से राजा हमेशा चिंतित रहते थे, क्योंकि बिना उत्तराधिकारी के उन्हें अपने राज्य और वंश के भविष्य की चिंता सताती थी।
राजा ने कई ऋषियों और विद्वानों से इसका कारण और उपाय पूछा। कुछ समय बाद ऋषि लोमश उनके राज्य में पधारे। राजा ने उनसे विनम्रता से अपनी पीड़ा बताई। ऋषि ने अपने ज्ञान से बताया कि पूर्वजन्म में राजा ने एक प्यासी गाय और एक राहगीर को पानी पीने से मना कर दिया था। इसी कर्म का फल इस जन्म में संतान न होने के रूप में सामने आया।
ऋषि लोमश ने राजा को उपाय बताया, श्रद्धा से श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने का। राजा, रानी और पूरे राज्य की प्रजा ने मिलकर यह व्रत रखा और इसका पुण्य राजा-रानी को संतान प्राप्ति के लिए समर्पित किया। भगवान विष्णु की कृपा से कुछ समय बाद रानी गर्भवती हुईं और उन्होंने एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया, जो आगे चलकर एक अच्छा राजा बना।
इस पुत्रदा एकादशी व्रत कथा (Putrada Ekadashi Vrat Katha) का सार यही है कि सच्ची श्रद्धा और सही विधि से रखा गया व्रत बड़ी से बड़ी कामना भी पूरी कर सकता है। इसीलिए यह व्रत आज भी संतान सुख की कामना रखने वाले परिवारों में बड़ी श्रद्धा से रखा जाता है।
पुत्रदा एकादशी व्रत के नियम
पुत्रदा एकादशी व्रत के नियम (Putrada Ekadashi Vrat ke Niyam) का पालन करने से व्रत का पूरा फल मिलता है।
✅ क्या करें
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें
- भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें और तुलसी अर्पित करें
- व्रत कथा सुनें या पढ़ें
- यथाशक्ति दान करें, विशेष रूप से वस्त्र और अन्न
- मन में सात्विक विचार रखें और भजन-कीर्तन करें
- तय समय पर ही पारण करें
❌ क्या न करें
- चावल, गेहूं और अन्य अनाज का सेवन न करें
- प्याज-लहसुन और तामसिक भोजन से दूर रहें
- मांस-मदिरा का सेवन बिल्कुल न करें
- दिन में सोने से बचें
- किसी से वाद-विवाद या कटु वचन न बोलें
- पारण का समय बीतने न दें, तय मुहूर्त में ही व्रत खोलें
जो लोग पूरी तरह उपवास नहीं रख सकते, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति फलाहार व्रत रख सकते हैं। पूजा में श्रद्धा और भाव सामग्री की मात्रा से ज्यादा मायने रखते हैं।
पुत्रदा एकादशी 2026 पर सही तारीख, मुहूर्त और सामग्री की जानकारी होने से व्रत बिना किसी परेशानी के पूरा हो जाता है। यह व्रत केवल एक रीति नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम और पारिवारिक कल्याण की भावना का प्रतीक भी है।