लोहड़ी 2026 पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
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लोहड़ी 2026 कैसे मनाएँ? शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धूप-अगरबत्ती का महत्

Dec 31, 2025

लोहड़ी (Lohri) उत्तर भारत का सबसे प्रमुख और खुशियों भरा त्योहार है जो सर्दियों के अंत और फसल कटाई के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है। यह त्योहार विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि लोहड़ी 2026 कैसे मनाएं, इसकी पूजा विधि क्या है और इस पर्व में धूप-अगरबत्ती का क्या महत्व है।

लोहड़ी 2026 की तारीख और शुभ मुहूर्त (Lohri Date 2026)

लोहड़ी 2026 की तिथि: मंगलवार, 13 जनवरी 2026

लोहड़ी का पर्व (Lohri festival) हर साल 13 जनवरी को मनाया जाता है, जो मकर संक्रांति से एक दिन पहले आता है। यह पौष माह की आखिरी रात को मनाया जाता है और इसके अगले दिन से माघ महीने की शुरुआत होती है।

लोहड़ी के शुभ मुहूर्त:

  • सूर्यास्त का समय: शाम 5:45 बजे के बाद

  • अलाव जलाने का सर्वोत्तम समय: गोधूलि मुहूर्त (शाम 5:42 से 6:09 बजे तक)

  • परिक्रमा का समय: शाम 6:00 से 8:00 बजे तक

यह समय अग्नि पूजा और फसल से जुड़े अनुष्ठानों के लिए सबसे शुभ माना जाता है।

लोहड़ी क्यों मनाई जाती है? (Lohri Celebration)

लोहड़ी का त्योहार (Lohri celebration) कई महत्वपूर्ण कारणों से मनाया जाता है:

  1. फसल कटाई का उत्सव: यह रबी की फसल, विशेष रूप से गेहूं और गन्ने की कटाई का जश्न है।

  2. सर्दी के अंत का संकेत: लोहड़ी शीत ऋतु के चरम अंत और लंबे दिनों की शुरुआत को दर्शाती है।

  3. सूर्य देव की उपासना: इस दिन सूर्य उत्तरायण की ओर बढ़ना शुरू करते हैं, जो हिंदू परंपरा में अत्यंत शुभ माना जाता है।

  4. अग्नि देव की पूजा: लोहड़ी पर अलाव जलाकर अग्नि देवता की आराधना की जाती है और उनसे समृद्धि की कामना की जाती है।

पंजाबी लोहड़ी की विशेषता (Punjabi Lohri)

पंजाबी लोहड़ी (Punjabi Lohri) का अपना अलग ही महत्व है। पंजाब में यह पर्व किसानों के लिए नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन किसान अपनी मेहनत का फल देखते हैं और प्रकृति का धन्यवाद करते हैं।

दुल्ला भट्टी की कहानी: पंजाबी लोहड़ी (Punjabi Lohri) में दुल्ला भट्टी की लोककथा बहुत प्रसिद्ध है। मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में दुल्ला भट्टी एक स्थानीय नायक थे जिन्हें 'पंजाब का रॉबिन हुड' कहा जाता है। उन्होंने गरीब लोगों की मदद की और लड़कियों को गुलामी से बचाया। लोहड़ी पर उनकी याद में गीत गाए जाते हैं।

लोहड़ी की पूजा विधि (Lohri Puja Vidhi)

लोहड़ी की पूजा विधि बहुत सरल और पारंपरिक है। आइए जानें कैसे करें:

पूजा की तैयारी:

  1. स्थान चुनें: घर के आंगन या खुली जगह में लोहड़ी का अलाव जलाने के लिए स्थान तैयार करें।

  2. लकड़ियां इकट्ठा करें: लोहड़ी से कुछ दिन पहले से सूखी लकड़ियां, उपले (गाय के गोबर के कंडे), और पुराने कपड़े इकट्ठा करें।

  3. पूजा सामग्री तैयार करें:

    • तिल (Sesame seeds)

    • गुड़ (Jaggery)

    • मूंगफली (Peanuts)

    • पॉपकॉर्न या मुरमुरे

    • गजक और रेवड़ी

    • चावल

    • गन्ना (अगर उपलब्ध हो)

    • धूप-अगरबत्ती

पूजा की विधि:

चरण 1: सूर्यास्त के बाद शुभ मुहूर्त में लोहड़ी का अलाव तैयार करें।

चरण 2: पूजा की थाली सजाएं और उसमें सभी लोहड़ी आइटम्स (Lohri items) रखें।

चरण 3: अग्नि देव और सूर्य देव का आह्वान करते हुए धूप-अगरबत्ती जलाएं।

चरण 4: लोहड़ी फायर (Lohri fire) को घी डालकर प्रज्वलित करें।

चरण 5: अलाव के चारों ओर परिक्रमा करें और निम्न मंत्र बोलें:

"सुंदरी मुंदरिए हो, तेरा कौन विचारा हो, दुल्ला भट्टी वाला हो"

चरण 6: अलाव में तिल, गुड़, मूंगफली, गजक, रेवड़ी और पॉपकॉर्न डालें। यह प्रकृति को धन्यवाद देने और समृद्धि की कामना का प्रतीक है।

चरण 7: सभी उपस्थित लोगों को प्रसाद बांटें।

चरण 8: लोहड़ी के पारंपरिक गीत गाएं और भांगड़ा-गिद्दा नृत्य करें।

चरण 9: परिवार और दोस्तों के साथ सरसों का साग, मक्की की रोटी और खीर जैसे पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लें।

नवविवाहित और नवजात के लिए विशेष:

जिन परिवारों में नई शादी हुई हो या नए बच्चे का जन्म हुआ हो, उनके लिए पहली लोहड़ी बेहद खास होती है। ऐसे परिवार बड़े उत्साह से यह त्योहार मनाते हैं और रिश्तेदारों को विशेष भोज देते हैं।

लोहड़ी में धूप-अगरबत्ती का महत्व

लोहड़ी पूजा में धूप और अगरबत्ती का उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। आइए जानें क्यों:

1. वातावरण शुद्धिकरण

धूप जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। प्राचीन वैदिक ग्रंथों में भी धूप के शुद्धिकरण गुणों का उल्लेख मिलता है। लोहड़ी के अवसर पर धूप जलाने से पूरे घर और आसपास का वातावरण पवित्र हो जाता है।

2. आध्यात्मिक महत्व

हिंदू परंपरा में धूप को सात्विक माना जाता है। जब हम पूजा के दौरान धूप जलाते हैं, तो उसका धुआं ऊपर की ओर उठता है, जो हमारी प्रार्थनाओं और मनोकामनाओं को देवताओं तक पहुंचाने का प्रतीक है। लोहड़ी पर धूप जलाना अग्नि देव और सूर्य देव को विशेष अर्पण माना जाता है।

3. मानसिक शांति

धूप और अगरबत्ती की सुगंध मन को शांत करती है और एकाग्रता बढ़ाती है। लोहड़ी जैसे त्योहार पर जब पूरा परिवार एक साथ इकट्ठा होता है, तो धूप की खुशबू एक शांतिपूर्ण और भक्तिमय वातावरण बनाती है।

4. संपूर्ण पूजा का अंग

वैदिक पूजा पद्धति में पंचोपचार (पांच पवित्र अर्पण) का विधान है, जिसमें गंध यानी सुगंध एक महत्वपूर्ण अंग है। धूप-अगरबत्ती इसी गंध अर्पण का प्रतीक है। बिना धूप के पूजा अधूरी मानी जाती है।

5. प्राकृतिक धूप का महत्व

लोहड़ी पूजा में प्राकृतिक सामग्री से बनी धूप का उपयोग करना चाहिए। गुग्गुल, चंदन, कपूर, तुलसी और गाय के गोबर से बनी धूप सबसे उत्तम मानी जाती है। ये न केवल सुगंध देती हैं बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर होती हैं।

धूप बनाम अगरबत्ती:

धूप: धूप में बांस की तीली नहीं होती और यह अधिक गाढ़ा धुआं और तीव्र सुगंध देती है। मंदिरों और विशेष पूजा अनुष्ठानों में धूप का उपयोग अधिक किया जाता है। लोहड़ी जैसे बड़े त्योहारों पर धूप जलाना अधिक शुभ माना जाता है क्योंकि यह पूरे क्षेत्र को पवित्र कर देती है।

अगरबत्ती: रोजमर्रा की पूजा और ध्यान के लिए अगरबत्ती उपयुक्त है। इसकी हल्की और सौम्य सुगंध दैनिक उपयोग के लिए आदर्श है।

लोहड़ी पर धूप जलाने की विधि:

  1. पूजा की शुरुआत में धूप अथवा धूप कप जलाएं

  2. धूप को अलाव के पास रखें

  3. धूप का धुआं चारों दिशाओं में घुमाएं

  4. मंत्र उच्चारण करें:

    "वनस्पतिसोद्भूतो गन्धाद्यो गन्धमुत्तमः। आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥"

लोहड़ी की परंपराएं (Lohri Traditions)

1. बच्चों का घर-घर जाना

लोहड़ी से कुछ दिन पहले बच्चे घर-घर जाकर लोहड़ी के गीत गाते हैं और बदले में तिल, गुड़, गजक, मूंगफली और पैसे इकट्ठा करते हैं। इस परंपरा को बहुत शुभ माना जाता है और बच्चों को खाली हाथ लौटाना अशुभ समझा जाता है।

2. भांगड़ा और गिद्दा

लोहड़ी पर पारंपरिक पंजाबी नृत्य भांगड़ा (पुरुषों द्वारा) और गिद्दा (महिलाओं द्वारा) किया जाता है। ढोल की थाप पर सभी मिलकर नाचते-गाते हैं।

3. पतंगबाजी

कुछ क्षेत्रों में लोहड़ी पर पतंग उड़ाने की भी परंपरा है।

4. विशेष भोजन

लोहड़ी पर सरसों का साग, मक्की की रोटी, तिल के लड्डू, गजक, रेवड़ी और खीर जैसे व्यंजन बनाए जाते हैं।

लोहड़ी मनाने के आधुनिक तरीके

आज के समय में लोहड़ी मनाने के तरीके कुछ बदल गए हैं लेकिन परंपराओं का सम्मान बना हुआ है:

  • इको-फ्रेंडली लोहड़ी: पर्यावरण की रक्षा के लिए छोटे अलाव या LED लाइट्स का उपयोग करना

  • सोशल मीडिया सेलिब्रेशन: परिवार और दोस्तों के साथ वर्चुअल लोहड़ी मनाना

  • कम्युनिटी इवेंट्स: सोसाइटी या कॉलोनी में सामूहिक लोहड़ी का आयोजन

  • ऑर्गेनिक उत्पादों का उपयोग: प्राकृतिक धूप और अगरबत्ती का इस्तेमाल

लोहड़ी के आवश्यक सामान (Lohri Items)

लोहड़ी मनाने के लिए निम्नलिखित वस्तुओं की जरूरत होती है:

पूजा सामग्री:

  • तिल (सफेद और काले)

  • गुड़

  • मूंगफली

  • रेवड़ी

  • गजक

  • पॉपकॉर्न/मुरमुरे

  • चावल

  • मिठाइयां

  • फल

  • धूप-अगरबत्ती

  • कपूर

  • घी

  • सुपारी

  • नारियल

अलाव के लिए:

  • सूखी लकड़ियां

  • उपले (गाय के गोबर के कंडे)

  • सूखी घास

  • पुराने कपड़े

सजावट:

  • रंगोली

  • दीये

  • फूलों की माला

  • सजावटी झंडियां

लोहड़ी का वैज्ञानिक महत्व

लोहड़ी केवल एक परंपरा नहीं है, इसका वैज्ञानिक आधार भी है:

  1. शीतकालीन संक्रमण: यह समय शीत ऋतु से वसंत ऋतु की ओर संक्रमण का है।

  2. पृथ्वी का झुकाव: इस दिन पृथ्वी सूर्य की ओर झुकना शुरू करती है, जिससे दिन लंबे होने लगते हैं।

  3. तिल और गुड़ का महत्व: सर्दियों में तिल और गुड़ शरीर को गर्मी प्रदान करते हैं और ऊर्जा बढ़ाते हैं।

  4. अग्नि का उपयोग: अलाव की गर्मी सर्दी में राहत देती है और धुआं कीटाणुओं को नष्ट करता है।

निष्कर्ष

लोहड़ी 2026 (Lohri 2026) केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम है। इस पर्व पर अलाव के चारों ओर इकट्ठा होकर, पारंपरिक गीत गाते हुए, और धूप-अगरबत्ती की पवित्र सुगंध के बीच परिवार और समाज के साथ समय बिताना एक अद्भुत अनुभव है।

इस लोहड़ी पर शुभ मुहूर्त में पूजा करें, प्राकृतिक धूप-अगरबत्ती का उपयोग करें, और सभी लोहड़ी आइटम्स (Lohri items) के साथ अग्नि देव की आराधना करें। यह पर्व आपके जीवन में खुशहाली, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आए।

लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाएं!

FAQs

1. लोहड़ी 2026 में कौन से दिन है?

लोहड़ी 2026 मंगलवार, 13 जनवरी को मनाई जाएगी। यह हर साल 13 जनवरी को ही आती है, जो मकर संक्रांति से एक दिन पहले होती है।

2. लोहड़ी के अलाव में क्या-क्या डालना चाहिए?

लोहड़ी के अलाव में तिल, गुड़, मूंगफली, पॉपकॉर्न, मुरमुरे, गजक, रेवड़ी, चावल और गन्ना डालना चाहिए। ये सभी चीजें समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक हैं और प्रकृति को धन्यवाद देने का तरीका हैं।

3. लोहड़ी पर धूप क्यों जलाई जाती है?

लोहड़ी पर धूप जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि यह वातावरण को शुद्ध करती है, नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है और देवताओं की आराधना का माध्यम है। धूप का धुआं प्रार्थनाओं को ऊपर ले जाने का प्रतीक है। प्राकृतिक धूप जैसे गुग्गुल, चंदन या गोबर की धूप सबसे उत्तम मानी जाती है।

4. लोहड़ी किन राज्यों में मनाई जाती है?

लोहड़ी मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और दिल्ली में मनाई जाती है। हालांकि, अब यह पूरे भारत में हिंदू और सिख समुदाय द्वारा उत्साह के साथ मनाया जाता है। पंजाब और हरियाणा में इसे सरकारी अवकाश के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।

5. नवविवाहित जोड़ों के लिए पहली लोहड़ी क्यों खास होती है?

नवविवाहित जोड़ों के लिए पहली लोहड़ी बहुत शुभ मानी जाती है क्योंकि यह नए जीवन की शुरुआत, उर्वरता और समृद्धि का प्रतीक है। इस दिन परिवार विशेष पूजा करता है, नवविवाहिता को विशेष रूप से सजाया जाता है, और रिश्तेदारों को भोज दिया जाता है। इसी तरह, नवजात शिशु की पहली लोहड़ी भी बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है।

 

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