मकर संक्रांति 2026 पूजा विधि, मंत्र और पूजा सामग्री
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मकर संक्रांति 2026: पूजा विधि, मंत्र और जरुरी पूजा सामग्री

Dec 31, 2025

मकर संक्रांति (Makar Sankranti) भारत के सबसे प्रमुख और पवित्र त्योहारों में से एक है। यह त्योहार हर साल जनवरी महीने में मनाया जाता है और इसे देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। आइए जानते हैं मकर संक्रांति 2026 (Makar Sankranti 2026) की पूर्ण जानकारी, पूजा विधि, मंत्र और आवश्यक पूजा सामग्री के बारे में।

मकर संक्रांति 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

मकर संक्रांति 2026 बुधवार, 14 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। यह तिथि हर साल लगभग एक ही रहती है क्योंकि यह सौर कैलेंडर पर आधारित है।

पुण्य काल मुहूर्त (Punya Kaal Muhurat): दोपहर 03:13 बजे से शाम 05:45 बजे तक (अवधि: 2 घंटे 32 मिनट)

महापुण्य काल मुहूर्त (Maha Punya Kaal Muhurat): दोपहर 03:13 बजे से 04:58 बजे तक (अवधि: 1 घंटा 45 मिनट)

पुण्य काल के दौरान की गई पूजा, स्नान और दान का विशेष महत्व होता है।

मकर संक्रांति क्या है और क्यों मनाई जाती है? (About Makar Sankranti)

मकर संक्रांति का शाब्दिक अर्थ है सूर्य की गति या संक्रमण। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जो उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है। उत्तरायण का अर्थ है सूर्य की दक्षिण से उत्तर की ओर यात्रा।

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है? (Makar Sankranti Why It Is Celebrated)

धार्मिक महत्व:

  • पुराणों के अनुसार, इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि देव से मिलने जाते हैं, जो मकर राशि के स्वामी हैं।

  • यह पिता-पुत्र के प्रेम और स्वस्थ संबंधों का प्रतीक है।

  • मान्यता है कि भगवान विष्णु ने इस दिन असुरों का अंत किया था।

  • महाभारत के अनुसार, भीष्म पितामह ने इसी दिन अपनी इच्छा से देह त्याग की थी।

प्राकृतिक महत्व:

  • यह सर्दी के अंत और लंबे दिनों की शुरुआत का संकेत देता है।

  • फसल कटाई का उत्सव और किसानों के लिए नई शुरुआत का समय।

मकर संक्रांति की खासियत (Makar Sankranti Special)

मकर संक्रांति को विशेष बनाने वाली कुछ बातें:

  • यह चंद्र कैलेंडर के बजाय सौर कैलेंडर पर आधारित है।

  • पूरे भारत में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है।

  • तिल-गुड़ का विशेष महत्व इस त्योहार में है।

  • पतंगबाजी इस त्योहार का प्रमुख आकर्षण है।

मकर संक्रांति पूजा विधि (Makar Sankranti Puja Vidhi)

संक्रांति पूजा की तैयारी (Sankranti Puja Preparation)

प्रातःकाल की तैयारी:

  1. सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई करें

  2. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें

  3. पूजा स्थल को रंगोली और फूलों से सजाएं

सूर्य देव की पूजा विधि (Surya Dev Puja Method)

स्नान और संकल्प: मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है। यदि नदी तक पहुंचना संभव न हो, तो घर में पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

सूर्य अर्घ्य देना: तांबे के लोटे में जल, गुड़, लाल पुष्प और चावल मिलाकर सूर्य को अर्पित करें।

पूजा की विधि:

  1. लकड़ी की चौकी पर गंगाजल छिड़कें और उसे शुद्ध करें

  2. चौकी पर कलश स्थापित करें

  3. सूर्य देव की मूर्ति या तस्वीर रखें

  4. दीपक जलाएं और अगरबत्ती लगाएं

  5. मूर्ति पर गंगाजल छिड़कें

  6. भगवान गणेश का स्मरण करते हुए पूजा शुरू करें

  7. हल्दी, चंदन, कुमकुम, दूर्वा घास, फूल और फल अर्पित करें

  8. तिल और गुड़ के लड्डू भगवान को भोग लगाएं

मकर संक्रांति के मंत्र (Makar Sankranti Mantras)

सूर्य मंत्र (Surya Mantra)

मुख्य सूर्य मंत्र:

ॐ घृणि सूर्याय नमः

(Om Ghrini Suryaya Namah)


सूर्य गायत्री मंत्र:

ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्

(Om Adityaya Vidmahe Divakaraya Dhimahi Tanno Suryah Prachodayat)


सूर्य स्तुति मंत्र:

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

(Om Hraam Hreem Hraum Sah Suryaya Namah)


इन मंत्रों का जाप कम से कम 21 बार या 108 बार करना चाहिए। आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

मकर संक्रांति पूजा सामग्री सूची (Puja Samagri List)

आवश्यक पूजा सामग्री (Essential Puja Items)

मुख्य सामग्री:

  1. सूर्य देव की मूर्ति या तस्वीर

  2. लकड़ी की चौकी

  3. कलश (तांबा या पीतल का)

  4. तांबे का लोटा (अर्घ्य के लिए)

  5. दीया और घी

  6. कपूर (Camphor)

  7. माचिस

पूजन सामग्री:

  1. हल्दी पाउडर (Turmeric Powder - Haldi)

  2. कुमकुम (Kumkum - Red Vermilion)

  3. चंदन का पेस्ट (Sandalwood Paste - Chandan)

  4. अक्षत (चावल और हल्दी का मिश्रण)

  5. मौली या कलावा (Holy Thread)

  6. रोली (Roli)

  7. फूल और माला (विशेषकर गेंदे के फूल)

  8. अगरबत्ती (Incense Sticks)

विशेष सामग्री:

  1. तिल (Sesame Seeds - Til) - 250 ग्राम

  2. गुड़ (Jaggery - Gud) - 250 ग्राम

  3. तिल-गुड़ के लड्डू (काले और सफेद)

  4. घेवर या अन्य मिठाई

  5. गन्ना

  6. मौसमी फल

  7. चावल

  8. उड़द की दाल

  9. गंगाजल या शुद्ध जल

अन्य आवश्यक चीजें:

  1. पान के पत्ते और सुपारी

  2. नारियल

  3. दूर्वा घास

  4. नया वस्त्र (दान के लिए)

  5. दक्षिणा (पैसे)

मकर संक्रांति पर क्या करें? (Things To Do On Makar Sankranti)

धार्मिक गतिविधियां

1. पवित्र स्नान:

  • पवित्र नदियों में स्नान करें, विशेषकर गंगा, यमुना या प्रयागराज में।

  • घर पर गंगाजल मिले पानी से स्नान करें।

2. दान-पुण्य: तिल, उड़द दाल, चावल, खिचड़ी, गुड़, गन्ना और सब्जी का दान करना लाभकारी होता है। अन्य दान सामग्री:

  • गर्म कपड़े और कंबल

  • अनाज और खाद्य सामग्री

  • बर्तन

  • गायों को चारा

3. मंत्र जाप और पाठ:

  • आदित्य ह्रदय स्तोत्र, श्रीनारायण कवच और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ शुभ माना जाता है।

पारंपरिक गतिविधियां

1. पतंगबाजी: पतंग उड़ाना मकर संक्रांति का सबसे लोकप्रिय और मजेदार हिस्सा है। यह स्वतंत्रता, खुशी और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।

2. विशेष व्यंजन:

  • तिल-गुड़ के लड्डू और चिक्की

  • खिचड़ी

  • पोंगल

  • उंधियू

  • पुरन पोली

  • गुड़ की रोटी

3. सामाजिक समारोह:

  • परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं

  • तिल-गुड़ बांटें और मीठा बोलें

  • नए कपड़े पहनें

  • मंदिर दर्शन करें

मकर संक्रांति का उत्सव (Celebration of Makar Sankranti)

विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति (Festival Makar Sankranti)

उत्तर प्रदेश और बिहार: खिचड़ी त्योहार के रूप में मनाया जाता है, खिचड़ी और चूड़ा-दही का दान किया जाता है।

पंजाब और हरियाणा: लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है, अग्नि जलाकर तिल और मूंगफली अर्पित की जाती है।

गुजरात और राजस्थान: उत्तरायण के नाम से जाना जाता है, पतंगबाजी प्रतियोगिताएं होती हैं।

तमिलनाडु: पोंगल के रूप में मनाया जाता है, नए चावल से खीर बनाई जाती है।

असम: माघ बिहू या भोगाली बिहू के नाम से मनाया जाता है।

पश्चिम बंगाल: गंगा सागर मेला लगता है, लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान करते हैं।

मकर संक्रांति का महत्व (Information About Makar Sankranti Festival)

आध्यात्मिक महत्व

मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का पर्व है। भविष्य पुराण में कहा गया है कि मकर संक्रांति पर सूर्यदेव की उपासना करने से व्यक्ति बुद्धिमान, मेधावी और समृद्ध बनता है।

उत्तरायण का महत्व:

  • देवताओं के दिन की शुरुआत

  • मोक्ष प्राप्ति का शुभ समय

  • नई शुरुआत और सकारात्मकता का प्रतीक

सामाजिक महत्व

  • पुराने झगड़ों को भूलकर नए रिश्ते बनाने का समय

  • तिल-गुड़ खाना मीठे बोल बोलने का प्रतीक है

  • समाज में प्रेम और सौहार्द बढ़ाने का अवसर

मकर संक्रांति 2026 के लिए विशेष टिप्स

  1. समय का ध्यान रखें: पुण्य काल और महापुण्य काल के दौरान ही पूजा और दान करें।

  2. शुद्धता बनाए रखें: पूजा से पहले स्नान अवश्य करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

  3. दान में उदारता: जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और आवश्यक वस्तुएं दान करें।

  4. सूर्य की किरणों का लाभ: सुबह की धूप में बैठें, यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

  5. पर्यावरण का ध्यान: पतंगबाजी करते समय पर्यावरण और पशु-पक्षियों का ध्यान रखें।

  6. परिवार के साथ समय: इस त्योहार को परिवार और दोस्तों के साथ मनाएं।

निष्कर्ष

मकर संक्रांति 2026 (Makar Sankranti 2026) एक पवित्र और शुभ अवसर है जो 14 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। यह त्योहार सूर्य देव की आराधना, फसल कटाई का उत्सव और नई शुरुआत का प्रतीक है। सही पूजा विधि (Makar Sankranti Puja), मंत्रों का जाप और उचित पूजा सामग्री के साथ इस त्योहार को मनाकर हम सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

तिल-गुड़ की मिठास की तरह ही हमारे जीवन में भी मधुरता आए और उत्तरायण की तरह हमारा जीवन भी उन्नति की ओर बढ़े। आइए, इस मकर संक्रांति को पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाएं।

शुभ मकर संक्रांति 2026! आप सभी को इस पावन पर्व की ढेर सारी शुभकामनाएं!

FAQs

1. मकर संक्रांति 2026 किस तारीख को है?

मकर संक्रांति 2026 बुधवार, 14 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। पुण्य काल का समय दोपहर 03:13 बजे से शाम 05:45 बजे तक रहेगा।

2. मकर संक्रांति पर कौन सी चीजें दान करनी चाहिए?

मकर संक्रांति पर तिल, गुड़, चावल, उड़द की दाल, खिचड़ी, गर्म कपड़े, कंबल, बर्तन, अनाज और गन्ना दान करना बेहद शुभ माना जाता है। गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराना भी पुण्यकारी होता है।

3. मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ क्यों खाया जाता है?

तिल शरीर में गर्मी पैदा करता है और सर्दियों में स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। गुड़ शरीर को शुद्ध करता है और पोषण देता है। इसके अलावा, तिल-गुड़ खाना मीठा बोलने और मधुर व्यवहार का प्रतीक है, जो पुरानी कड़वाहट को दूर कर प्रेम और सौहार्द बढ़ाता है।

4. मकर संक्रांति पर कौन सा मंत्र जपना चाहिए?

मकर संक्रांति पर "ॐ घृणि सूर्याय नमः" और सूर्य गायत्री मंत्र "ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्" का जाप करना चाहिए। आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ भी अत्यंत शुभफलदायी होता है। इन मंत्रों का जाप कम से कम 21 बार या 108 बार करना चाहिए।

5. मकर संक्रांति पर पतंग क्यों उड़ाई जाती है?

पतंग उड़ाना खासकर गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में लोकप्रिय है। यह स्वतंत्रता, खुशी और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। आकाश में रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाना त्योहार की रोशनी, आशा और सामुदायिक भावना का प्रतिदर्शन करता है। सुबह की धूप में पतंग उड़ाना स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।

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